दुनिया से बेगाने हैं
मोहब्बत की राहों में दिल हार बैठे हैं,
हम तो खुद को ही अपना गुनहगार बैठे हैं।
अब क्या सोचना कि ज़माना क्या कहेगा,
हम तो सर-ए-आम अपनी चाहत का इकरार बैठे हैं।
ना मंज़िल की फिक्र, ना रास्तों का कोई डर,
जब से थाम लिया है तूने मेरा हाथ हमसफ़र।
लोग ढूँढते हैं खुदा को न जाने कहाँ-कहाँ,
हमें तो बस तुझमें ही दिखता है अपना रब्ब मगर।
महफ़िलें सजी रहें चाहे लाख दुनिया की,
हमें तो बस तेरी ख़ामोशियों को गुनगुनाना है।
तू ही मेरी बंदगी, तू ही मेरी मन्नत है,
इस दीवाने को बस तेरा ही होकर रह जाना है।
ये कैसी कशिश है तेरी मासूम उल्फ़त में,
कि हम अपने ही वजूद से अनजाने हैं।
हाँ, लोग सच ही कहते हैं हमारे बारे में,
कि हम तेरे आशिक, और बस तेरे दीवाने हैं।
ज़माने की रस्मों से हम सर्वथा अनजान बैठे हैं,
दिल की हथेली पर अपनी पूरी जान बैठे हैं।
दिलों के दरमियां ये कैसी दीवारें खड़ी हैं भला,
हम तो हर एक दीवार को महज़ रेत मान बैठे हैं।
इश्क का सफर और दुनिया के पहरे
भले ही लाख पहरे लगा दे यह बेरहम दुनिया हम पर,
तेरी सूनी राहों से कदम हमारे अब पीछे न हटेंगे।
यह इश्क का गहरा दरिया है, डूब के ही पार जाना है,
हम तूफानी लहरों के खौफ से कभी न डरेंगे।
नसीब की लकीरों को हम खुद अपने हाथों से बदल देंगे,
तू जो थाम ले हाथ, तो हम हर मंज़िल को पा लेंगे।
इस सफर में न कोई शिकवा होगा, न कोई मलाल,
तेरी एक मुस्कुराहट के बदले हम हर दर्द छुपा लेंगे।
तेरे पवित्र नाम से ही शुरू और तुझपे ही ख़त्म,
हमारी तो हर आती-जाती साँस में तेरा ही तराना है।
कोई चाहे दीवानगी कहे या कहे हमें ज़माने का काफ़िर,
हमें तो बस आख़िरी दम तक तेरी चाहत का हक़ निभाना है।
शमा चाहे जितनी भी दूर क्यों न जलती हो हमसे,
ये परवाने तो बस दीवानगी में जलने का हुनर जानते हैं।
हम सारी दुनिया की महफ़िलों से बेगाने सही 'हमदम',
पर सिर्फ और सिर्फ तुझमें ही हम अपनी पूरी कायनात मानते हैं।
अब न कोई बंदिश रोक पाएगी इन आज़ाद धड़कनों को,
न यह ज़माना कभी हमारे दरमियां कोई दूरी ला पाएगा।
हम वो आशिक हैं जो इतिहास के पन्नों पर अमर रहेंगे,
हमारा यह निश्छल प्यार सदियों तक दोहराया जाएगा।
ज़माने की रस्मों से हम अनजान बैठे हैं,
दिल की हथेली पर अपनी जान बैठे हैं।
दिलों के दरमियां ये कैसी दीवारें खड़ी हैं,
हम तो हर दीवार को महज़ रेत मान बैठे हैं।
भले ही लाख पहरे लगा दे ये दुनिया हम पर,
तेरी राहों से कदम हमारे पीछे न हटेंगे।
यह इश्क का दरिया है, डूब के ही जाना है,
हम लहरों के खौफ से कभी न डरेंगे।
तेरे नाम से ही शुरू और तुझपे ही ख़त्म,
हमारी तो हर साँस में तेरा ही तराना है।
कोई दीवानगी कहे या कहे हमें काफ़िर,
हमें तो बस तेरी चाहत का हक़ निभाना है।
शमा चाहे जितनी भी दूर क्यों न हो हमसे,
ये परवाने जलने का हुनर जानते हैं।
हम सारी दुनिया से बेगाने सही 'हमदम',
पर तुझमें ही हम अपनी कायनात मानते हैं।
इश्क़ का मुकम्मल आसमां
वक्त की गर्दिशें बदलेंगी, ये मौसम भी बदलेंगे,
मगर तेरी चाहत के रंग कभी न ढलेंगे।
भीड़ में इस जहाँ की हम खो भी जाएँ अगर,
तेरी धड़कनों का रास्ता ढूँढ कर हम निकलेंगे।
न कोई शिकवा ज़माने से, न कोई गिला है,
जब से तेरी रूह का मुझे ये साया मिला है।
लकीरें हाथों की चाहे जो भी गवाही दें,
मेरा हर ख़्वाब बस तेरी पनाह में खिला है।
ज़माने की रस्मों से हम सर्वथा अनजान बैठे हैं,
लगाकर दांव सांसों का, हृदय में प्राण बैठे हैं।
दिलों के दरमियां ये कैसी दीवारें खड़ी हैं भला?
हम तो हर एक अवरोध को महज़ रेत मान बैठे हैं।
भले ही लाख पहरे लगा दे ये दुनिया हमारी राहों पर,
तेरी चौखट से कदम हमारे अब पीछे न हटेंगे।
यह इश्क का वो अगाध दरिया है, जहाँ डूब के ही जाना है,
हम तूफानी लहरों के खौफ से कभी न डरेंगे।
तेरे नाम से ही शुरू और तुझपे ही ख़त्म हर दास्तान,
हमारी तो हर धड़कन में बस तेरा ही तराना है।
कोई दीवानगी कहे या कहे हमें ज़माने का काफ़िर,
हमें तो बस इस जनम तेरी चाहत का हक़ निभाना है।
रूह का सफ़र
ये कैसी कशिश है जो खींच लाती है तेरी ओर,
जैसे बंधी हो ये ज़िन्दगी किसी अनजानी डोर।
न दिन की सुध-बुध रही, न रातों का अब होश है,
तेरी ख़ामोशी में भी गूंजता एक अजब सा शोर है।
जग छूटा, समाज छूटा, छूटे सब ठाट-बाठ यहाँ,
तेरी गलियों में आकर ठहर गया हमारा सारा जहाँ।
अब तो आईने में भी अक्स हमारा दिखाई नहीं देता,
तेरे रंग में रंगे हैं ऐसे कि कोई और रंग चढ़ता नहीं दिखता।
हम सारी दुनिया की नज़रों में बेगाने सही 'हमदम',
पर तेरी मखमली बांहों में ही हम अपनी पूरी कायनात मानते हैं।
अब न कोई बंदिश रोक पाएगी, न कोई दस्तूर,
तेरा इश्क ही हमारी ताकत है, तेरा ही है ये सरूर।
सदियों तक गाएगी दुनिया हमारी वफ़ा के ये नगमे,
कि हम तो सिर्फ और सिर्फ, तेरी चाहत के परवाने हैं।