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प्रेम की शाश्वत बहार

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Lyrics

चाँद की शीतलता में जो मौन गहरा है,
उस पर हमारी चाहत का हीपहरा है।
न तलवार की धार इसे काट पाती है,
न मौत की खामोशी इसे मिटा पाती है।
​यह प्रेम कोई धागा नहीं जो टूट जाए,
यह कोई किनारा नहीं जो पीछे छूट जाए।
साँसों की डोरी भले ही टूटजाएगी यहाँ,
पर हमारी दास्ताँ दोहराएगा ये सारा जहाँ।
जो न थमा समय की धार से, जो न सिमटा इस संसार में,
वही तो एक अहसास है, जो धड़क रहा है प्यारमें।
न इसे आदि की कोई खोज है, न अंत का कोई भय यहाँ,
यह वह दिया है जो जल रहा है, हृदय के सूने मजार में।
​जब सृष्टि का कोई रूप न था, जब शून्य में केवल मौन था,तब भी एक अनकही प्यास थी, जो गूंजती थी पुकार में।यह दो आत्माओं का योग है,
जो खिलता है पतझड़ के बाद भी, एक शाश्वत सी बहार में।
प्रेम माँगता नहीं कुछ भी, यह तो बस खो जाने का नाम है,
राधा के रोते हुए आंसुओं में, बसते सांवरिया घनश्याम हैं।"
​न कोई शर्त है इस डगर में, न कोई जीत-हार का दावा है,
जहाँ खुद को खोकर पा लियायह दो जिस्मों का मिलन नहीं,

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