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एहसास

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Lyrics

[male vocals] ओए,

सु

ना

कु

बा

तें

अनकही

ही

अच्

छी

लगती

हैं

कु

एहसा

दि

के

अं

दर

ऐसे

ही

रहने

दो

ज़ा

हि

कर

दो

तो

कदर

कम

हो

जा

ती

है

जो

बा

लफ़्

ज़ों

में

आकर

बि

खर

जा

वो

ख़ा

मो

शी

में

रहकर

ही

मु

कम्

मल

हो

ती

है

छु

प-छु

कर

नि

हा

रना

ही

हसी

है

सा

मने

आएँ

तो

नज़

रें

कतरा

ती

हैं

ये

एहसा

स,

जो

ना

से

परे

है

ये

एहसा

स,

जो

दि

की

नज़

दी

है

बे

ना

से

इस

रि

श्

ते

में

एक

अलग

ही

नशा

है

ना

दे

दो

तो

अक्

सर

दू

रि

याँ

बढ़

जा

ती

हैं

ओह

हो,

दू

रि

याँ

बढ़

जा

ती

हैं

सं

जो

कर

रखी

हैं

जो

या

दें

सी

ने

में

उन्

हें

दु

नि

या

की

नज़

रों

से

छु

पा

कर

रखो

हर

हक़ी

क़

का

बयाँ

हो

ना

ज़

रू

री

नहीं

कु

ख्

वा

बों

को

बस

ख़्

वा

ही

रहने

दो

क्

या

बा

त,

दि

में

ही

रहने

दो

ये

एहसा

स,

जो

ना

से

परे

है

ये

एहसा

स,

जो

दि

की

नज़

दी

है

बे

ना

से

इस

रि

श्

ते

में

एक

अलग

ही

नशा

है

ना

दे

दो

तो

अक्

सर

दू

रि

याँ

बढ़

जा

ती

हैं

ज़ा

हि

कर

दो

गे

तो

शा

यद

वो

रु

तबा

रहे

इन

अनकहे

जज्

बा

तों

की

अपनी

ही

एक

शा

है

गहरा

समुं

दर

की

तल

में

ही

रहती

है

सतह

पर

तो

बस

लहरों

का

गु

मा

है

दू

म,

खा

मो

शी

की

एक

अपनी

उड़ा

है

ना

तु

कहो,

ना

हम

कहें

ये

चु

प्

पी

ही

इबा

दत

बन

जा

ये

रू

का

रि

श्

ता

है,

मे

रे

एहसा

कभी

टू

टे,

बस

ऐसे

ही

नि

भा

सु

ना,

ये

इबा

दत

है

ये

एहसा

स,

जो

ना

से

परे

है

ये

एहसा

स,

जो

दि

की

नज़

दी

है

बे

ना

से

इस

रि

श्

ते

में

एक

अलग

ही

नशा

है

ना

दे

दो

तो

अक्

सर

दू

रि

याँ

बढ़

जा

ती

हैं

कु

ख्

वा

बों

को

बस

ख़्

वा

ही

रहने

दो

एहसा

को

दि

के

अं

दर

रहने

दो

है,

बस

रहने

दो

मु

कम्

मल

है,

ये

ख़ा

मो

शी

मु

कम्

मल

है

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