सुइयों पर थमी धड़कनें...
सुइयों पर थमी धड़कनें... तेरी याद में
घड़ी की सुइयाँ चलती हैं,
पर वक़्त जैसे ठहर गया है,
कमरे के इस सूनेपन में,
तेरा साया बिखर गया है।
टिक-टिक करती ये सुइयाँ,
अब सीने में चुभती हैं,
तेरी याद में ओ साजन,
ये धड़कनें भी रुकती हैं।
हर लम्हा जो तेरे बिना गुज़रता है, ऐसा लगता है जैसे वक़्त ने अपनी रफ़्तार बदल ली हो।
आँखें दरवाज़े पर टिकी हैं और दिल बस तेरी एक आहट का तलबगार है।
सुइयों पर थमी हैं धड़कनें, अब और न आज़मा मुझे,
या तो लौट आ वापस, या फिर ख़्वाबों में ही बुला मुझे।"
लौट आओ कि ये सुइयाँ फिर से मुस्कुराने लगें, और ये थमी हुई धड़कनें फिर से गुनगुनाने लगें।
समय की रेत मुट्ठी से फिसलती जा रही है,
पर दीवार पर टंगी उस घड़ी की सुइयां जैसे वहीं ठहर गई हैं।
तुम्हारी याद का एक ऐसा कोहरा छाया है,
जिसमें दिल की धड़कनें भी अब सांस लेने से कतराती हैं...
टिक-टिक करती इस घड़ी की सुइयों पर,
जैसे थम सी गई हैं मेरी धड़कनें... तेरी याद में।
एक लम्हा जो गुज़रा था तुम्हारे साथ कभी,
अब उसी मोड़ पर रुक गई हैं ज़िन्दगी की राहें... तेरी याद में।
रात की ख़ामोशी में जब दुनिया सो जाती है,
सिर्फ़ एक साया है जो मेरे सिरहाने आता है।
हवा का हर झोंका तुम्हारी छुअन का अहसास कराता है,
और आँखों से नींद ओझल हो जाती है... तेरी याद में।
"सर्द रातों में सुलगती है यह तन्हाई इस कदर,
कि सांसें तो चलती हैं, पर ज़िंदा होने का गुमान नहीं होता।"
दरवाज़े पर टिकी हैं निगाहें इस उम्मीद के साथ,
कि शायद पलटेगा वो दौर, थमेगा यह आंसुओं का सैलाब।
पर सुइयां टस से मस नहीं होतीं, और दिल डूबता जाता है,
जी रहे हैं बस यूं ही, एक ख़ामोश मौत... तेरी याद में।