कागज़ पर बिखरे हैं कुछ अनकहे से जज़्बात,
शायद तुम तक पहुँच जाए मेरे दिल की बात। (oye)
काँपते हाथों से उठाई है आज मैंने कलम,
लिखने बैठा हूँ एक खत, सिर्फ तुम्हारे नाम।
ना कोई शिकायत, ना कोई शिकवा आज है,
बस यादों में डूबा, मेरा हर एक साँस है। (hai)
ये खत नहीं मेरे दिल का एक टुकड़ा है,
जो आज भी सिर्फ और सिर्फ, तेरे नाम लिखा है।
अनकहे जज़्बात हैं, जो आँखों में तैर से गए हैं,
फासले चाहे जितने हों, पर तुम यहीं मेरे पास हो।
याद है वो पहली बारिश, तेरा यूँ कतराना,
मेरे कंधे पर सर रख कर, वो चुपके से सो जाना।
वो हँसी तुम्हारी काँच जैसी, आज भी मेरे ज़हन में है,
हर साँस में महकती है तुम्हारी आरज़ू। (oh ho)
ये खत नहीं मेरे दिल का एक टुकड़ा है,
जो आज भी सिर्फ और सिर्फ, तेरे नाम लिखा है।
अनकहे जज़्बात हैं, जो आँखों में तैर से गए हैं,
फासले चाहे जितने हों, पर तुम यहीं मेरे पास हो।
तू खुश रहे जहाँ भी रहे, बस यही दुआ है मेरी,
इस अधूरेपन में भी शामिल है रज़ा तेरी। (kya baat)