पल-पल दिल के पास
पल-पल दिल के पास रहती हो,
तुम बनकर मेरी हर आस रहती हो।
दूरी चाहे मीलों की हो हमारे दरमियाँ,
पर तुम हर लम्हा मेरे पास रहती हो।
तुम कोई ख्वाब नहीं, मेरी हकीकत हो,
खुदा की तराशी हुई सबसे हसीं मूरत हो।
दुनिया की इस बेगाना भीड़ में सनम,
तुम ही तो जीने की इकलौती ज़रूरत हो।
तारों की महफ़िल में जैसे चाँद का नूर है,
वैसे ही तुमसे मेरी ज़िंदगी में सरूर है।
कहने को तो दूर हो तुम मेरी नज़रों से,
पर इस दिल के तुम सबसे हुज़ूर हो।
पल-पल दिल के पास रहती हो,
तुम मेरी रूह का अटूट अहसास रहती हो।
धड़कन की हर एक लय में बस नाम तुम्हारा है,
इस भटके हुए राही का तुम ही किनारा है।
कहने को तो दूरियाँ हैं हमारे दरमियाँ,
पर इस दिल ने तुम्हें रूह में उतारा है।
जब हवा छूकर गुज़रती है इन गालों को,
लौट आती है यादें, सुलझाने उन गुत्थियों को।
लगता है जैसे तुम हौले से कुछ कहती हो,
पल-पल दिल के पास रहती हो...
लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं जब बात तुम्हारी होती है,
इन सूनी आँखों में फिर यादों की बरसात होती है।
तुम पास नहीं, फिर भी तुम्हारा अहसास मुकम्मल है,
जैसे तपती धूप में सावन की पहली फुहार शीतल है।
ज़िंदगी की इस कशमकश और हर एक शोर में,
तुम बनकर सुकून का इक लम्हा ठहरती हो।
पल-पल दिल के पास रहती हो...
तुम एक ऐसी ग़ज़ल हो जिसे मैं रोज़ गुनगुनाता हूँ,
अपनी हर अधूरी दुआ में बस तुम्हें ही माँग लाता हूँ।
वक़्त बदलेगा, बदल जाएगी यह दुनिया सारी,
पर कम न होगी कभी ये दीवानगी हमारी।
तुम मेरी सुबह का नूर, मेरी शाम की तन्हाई हो,
जिससे महकती है ज़िंदगी, तुम वो परछाई हो।
दूर रहकर भी तुम मेरे वजूद का हिस्सा हो,
मेरी कहानी का सबसे ख़ूबसूरत क़िस्सा हो।
आईने में देखूँ तो अक्स तुम्हारा नज़र आता है,
तुम्हारी हँसी से ही मेरा हर दिन सँवर जाता है।
तुम धड़कन बनकर इस दिल में चौबीस घंटे धड़कती हो,
हाँ, तुम पल-पल मेरे दिल के पास रहती हो...
जब रात की ख़ामोशी चारों ओर फैलती है,
और चाँदनी खिड़की से आकर मुझे छूती है,
तब हवा का हर एक झोंका तुम्हारी ही बात करता है।
तुम कुछ न कहकर भी, मेरे कानों में हौले से
अपनी मोहब्बत की दास्तान कह जाती हो।
बंद आँखों में जो चेहरा उभरता है, वह तुम्हारा है,
इस भटकते हुए दिल का बस एक ही तो सहारा है।
दुनिया की इस भीड़ में, जब भी तन्हाई डराती है,
तुम्हारी यादों की गर्माहट मुझे खुद में समेट लेती है।
तुम मेरी रूह की परछाई बनकर साथ चलती हो।
दूरी चाहे मीलों की हो या वक़्त के पहरों की,
तुम धड़कन की तरह हर पल मेरे दिल के पास रहती हो।"
पल-पल दिल के पास रहती हो,
बनकर तुम इक मीठी प्यास रहती हो।
भीड़ में भी जो तन्हाई का अहसास करा दे,
तुम वह ख़ामोश, मुकद्दर का राज़ रहती हो।
जब भी हवा का झोंका मुझे छूकर गुज़रता है,
ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी उंगलियों ने मेरी जुल्फ़ों को संवारा हो।
जब भी आसमान में कोई सितारा टूटकर गिरता है,
ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी आँखों से कोई ख़्वाब आवारा हो।
तुम सिर्फ़ एक याद नहीं, जो आए और चली जाए,
तुम तो वह सांस हो, जो ठहर जाए तो ज़िंदगी थम जाए।
मेरी धड़कनों की लय में, मेरी रगों के प्रवाह में,
तुम एक अनकही, अटूट दास्तान की तरह बहती हो।
इन सब रंगों को समेटे, तुम मुझमें धड़कती हो,
बिना कुछ कहे, तुम सब कुछ कह जाती हो।
दुनिया की नजरों से दूर, इस दिल के सबसे महफूज़ कोने में,
तुम एक पवित्र इबादत की तरह रहती हो।
समय बदलेगा, मौसम बदलेंगे, शायद यह जहां भी बदल जाए,
पर जो मुकम्मल है, वह कभी फ़ना नहीं होता।
मेरी हर नज़्म में, मेरे हर ख़्याल के उरूज में,
तुम्हारा अक्स ही है, जो कभी मुझसे जुदा नहीं होता।
तुम पास हो, क्योंकि तुम मुझमें समाई हो,
तुम दूर हो, फिर भी तुम ही मेरी परछाई हो।
कोई पूछे जो मुझसे कि तुम कैसी दिखती हो,
मैं कहूँगा, जैसी मेरी रूह की तन्हाई और उसकी रुसवाई हो।
पल-पल दिल के पास रहती हो,
तुम मेरी ही ज़िंदगी का, इक हसीं लिबास रहती हो।