खबर है कि उनको खबर ही नहीं है
मोहब्बत की उनकी नजर ही नहीं है
चलो हमको क्या लेना उनकी नजर से
फना दिल हमारा है नजर भी वहीं है
कसम खा के कहते हैं उन्हीं की कसम से
मोहब्बत नहीं है इबादत सनम से
वो कहते हैं ‘काफिर’ से सजदे में क्यों है
बता दो कि शोहरत मिली है हमें से
मेरी सुर्ख आंखों में बसता है कोई
कई रात हमने सितारों में खोई
कभी जलजला बनके हमको मिटा दो
चले सांस जब तक मिले अब ना कोई
हजारों-हजारों मिनारें बनाकर
दयारों दरख्तों को तेरा बनाकर
जुनूं सख्त तुझ पर निछावर किया है
मिटा खुद को तेरे हवाले किया है
अजब की गजब की रवानी तेरी है
बड़ी बेवजह सी जुबानी मेरी है
मेरे हर्फ तुझको मुनासिब नहीं है
लिखी हमने तेरी कहानी अलग है
कभी हुस्न तेरा मुकम्मिल मिला था
मिली थी हमें सर्द रातों की गर्मी
बदलते रहे रात दिन यूँ मुसलसल
हमारा सफर सुर्ख दरिया बना था
अभी हमने डाला है डेरे पे पहरा
लगी आग जब से दिखा चेहरा तेरा
चरागों से कह दो करें काम अपना
चले सांस जब तक गो आतिश हो तेरा
मिले से मिलती नहीं आह कोई
कुरेदा है जख्मों को थोड़ा दबाकर
लहू मेरी आंखों से रिसता है बेहतर
मेरा दिल है खालिस बाज़ीचा ना कोई