चांद भी फीका लगता है तेरे सामने,
सितारे भी झुक जाते हैं तेरे सामने,
इतनी मोहब्बत है तुझसे ऐ सनम,
कि हम खुद को भूल जाते हैं तेरे सामने।
तेरी तस्वीर को दिल से लगाया है,
तेरे प्यार को अपनी दुनिया बनाया है,
चाहे मिले या ना मिले तू कभी,
हमने तुझे अपनी दुआओं में बसाया है। ❤️
खामोश लबों पर एक नाम रहता है,
आंखों में बस तेरा ही ख्वाब रहता है,
चाहे कितनी भी दूर हो जाए दुनिया,
दिल में हमेशा तेरा एहसास रहता है।
इश्क़ में हमने सब कुछ भुला दिया,
तेरे नाम को दिल में बसा लिया,
जब भी आई तेरी याद हमें,
आंखों ने चुपके से बता दिया।
खामोश लबों पर एक नाम रहता है,
धड़कन में छुपा कोई पैगाम रहता है।
दुनिया की महफ़िल में हम भले खो जाएँ,
पर दिल में तो बस तुम्हारा ही मुकाम रहता है।
आँखों में बस तेरी ही सूरत का ख्वाब है,
तू मेरे हर अनकहे सवाल का जवाब है।
फासले जितने भी बढ़ जाएँ हमारे दरमियाँ,
तेरा ही एहसास हर सांस में बेहिसाब है।
चुप रहकर भी सब कुछ कह जाती हैं आँखें,
तेरी यादों के साए में कटती हैं रातें।
ज़माने को भले ही हम ख़ामोश नज़र आएँ,
पर ख़यालों में चलती हैं बस तेरी ही बातें।
इश्क़ का ये रंग भी कितना हसीन है,
तू दूर होकर भी दिल के सबसे करीब है।
इस खामोशी में जो गूँजती है सदा तुम्हारी,
वही मेरे जीने का सबसे खूबसूरत नसीब है।
खामोश लबों पर एक नाम रहता है
खामोश लबों पर एक नाम रहता है,
धड़कनों में सुबह-ओ-शाम रहता है।
दुनिया समझती है तन्हा हैं हम,
पर इस सूनेपन में भी कोई गुलफ़ाम रहता है।
आँखों में बस तेरा ही ख्वाब रहता है,
सवालों का तू ही इकलौता जवाब रहता है।
हज़ार चेहरे गुज़रते हैं इस नज़र के सामने,
मगर इस दिल पर बस तेरा ही शबाब रहता है।
चाहे कितनी भी दूर हो जाए यह दुनिया,
ज़माने की बंदिशों की हमें क्या परवाह।
दूरियों से मोहब्बत कभी कम नहीं होती,
तू दूर होकर भी साँसों के पास रहता है।
दिल में हमेशा तेरा ही एहसास रहता है,
जैसे तपती धूप में सावन की आस रहता है।
जुबां से भले हम कुछ न कहें तुमसे,
पर हमारी खामोशी में भी तेरा पैगाम रहता है।
तुम मिले तो जैसे मुकम्मल हुई ज़िन्दगी,
ना मिले तो दुआओं में तेरा मुकाम रहता है।
इश्क़ की इस पावन और सच्ची इबादत में,
आँखों की नमी में भी तेरा ही सलाम रहता है।
खामोश लबों पर एक नाम रहता है,
धड़कनों में बस तेरा ही पैगाम रहता है।
यह दिल रात-दिन बस उसी के नाम बहता है।
महफ़िल में भी जो तन्हाई का एहसास करा दे,
वो एक शख़्स मेरी धड़कनों के बहुत पास रहता है।
ज़ुबान से न सही, नज़रों से इकरार होता है,
बिना कहे भी सदियों का इंतज़ार होता है।
दुनिया सोचती है कि हम चुपचाप जी रहे हैं,
पर इस ख़ामोशी में छुपा गहरा प्यार होता है।
आँखों में बस तेरा ही ख्वाब रहता है,
सवालों के इस समंदर में तू ही जवाब रहता है।
चाहे कितनी भी दूरियाँ बढ़ा ले यह ज़माना,
रूह में हर पल बस तेरा ही एहसास रहता है।
जब भी हवा का कोई झोंका मुझे छू कर गुज़रता है,
ऐसा लगता है जैसे तूने चुपके से पुकारा है।
दुनिया की इस भीड़ में हमें किसी की चाह नहीं,
हमने तो अपनी हर दुआ में सिर्फ तुझको सवारा है।
इश्क़ में हमने खुद को कुछ इस तरह भुला दिया,
तेरी यादों को ही अपनी ज़िंदगी का साया बना लिया।
अब लब कुछ न कहें, तो कोई शिकवा न करना,
क्योंकि आँखों ने चुपके से सब कुछ बता दिया।
कहने को तो लफ़्ज़ ठहर से गए हैं,
जज्बात भीतर ही भीतर गहरे उतर से गए हैं।
जब भी तन्हाई रातों को दस्तक देती है,
धड़कनों में बस तेरा ही एहसास रहता है।
चाहत की इस राह में दूरियाँ भले जितनी हों,
मजबूरियों की दीवारें चाहें कितनी बड़ी हों।
हर दुआ में खुदा से तुझे ही माँगा है,
साँसों पर बस तेरा ही अख्तियार रहता है।
नज़रे उठाऊँ तो हर चेहरे में तू दिखे,
नज़रे झुकाऊँ तो रूह में तेरी छुअन मिले।
ये कैसा इश्क़ है जो जुबां से बयाँ नहीं होता,
फिर भी इन खामोश लबों पर सिर्फ एक तेरा नाम रहता है।