(ओये!) ये कैसी पहेली है ज़िंदगी, क्या बात!
जीना है इसे, सुलझाना नहीं
धूप की तलाश में छाँव से गुज़रे हम
खुद को खोकर ही, खुद को पाए हम
वही दफ़्तर, वही रोटी का चक्कर, है!
थक कर सो जाना, बस इसमें क्या रखा है?
चेहरों पर मुखौटे, दिलों में कड़वाहटें
इन खोखले रिश्तों में, बोलो रखा क्या है?
ज़िंदगी एक पहेली है, सुलझाना नहीं
हर साँस में, हर पल में, बस जीना ही सही
जो जी लिया जी भर के, उस पल में 'सब कुछ' है (कमाल!)
ये सफ़र है प्यारा, इसका मक़सद तो बस ये ही है
गिरकर संभलने का जादुई हुनर है (ओह हो!)
अंधेरी सुरंग में भी दिखती सहर है
किसी प्यासे को पानी, वो छोटा सा पल, सुन ना!
उस सुकून के सिवा, जन्नत में रखा क्या है?
हार कर भी जो हार ना माने, वही तो ख़ुदा है
जीतने के बाद तो, हारने के सिवा रखा क्या है?
ज़िंदगी एक पहेली है, सुलझाना नहीं
हर साँस में, हर पल में, बस जीना ही सही
जो जी लिया जी भर के, उस पल में 'सब कुछ' है
ये सफ़र है प्यारा, इसका मक़सद तो बस ये ही है
ज़िंदगी में 'कुछ' नहीं, ज़िंदगी में सब कुछ है
दूम! इसे बाँटकर देखो, इसे जी कर देखो!