नगमा प्यार का गाता सनम
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
दुनिया की रस्मों को भूलकर,
बस तुझमें ही खो जाता सनम।
कदम खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं,
जब तेरे शहर की हवाएं बुलाती हैं।
गुनगुनाता है दिल बस एक ही तराना,
कि अब तो मुमकिन नहीं तुझसे दूर जाना।
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
कदमों की आहट सुन ले मेरी,
मैं सदियों का प्यासा सनम।
इस मोड़ पर आकर ठहर जाती है नजर,
जैसे थम जाता है यहाँ वक्त का सफर।
धड़कन में बस एक तेरी ही आस है,
तू दूर होकर भी मेरे दिल के पास है।
धुनों को अपनी हवा में बहाता सनम।
जब तक ये सांसें चलेंगी मेरी,
यही गीत मैं दोहराता सनम।तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
कदमों की आहट सुन ले मेरी,
पलकों की चौखट खोल सनम।
इस मोड़ पर आकर ठहर गई,
धड़कन जो मेरी थी बेअसर।
दीवार-ओ-दर भी हँसते हैं,
जब गुज़रूँ यहाँ से बेख़बर।
तेरी यादों का सरमाया है,
जो इस दिल ने है पाया सनम।
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
तू माने या न माने इसे,
ये इश्क़ नहीं है कम सनम।
हर रोज़ इसी उम्मीद में हम,
सहते हैं जुदाई का ग़म सनम।
चाहे जमाना लाख हँसे,
या राहों में दीवारें खड़ी करे,
इस आशिक़ का तो मज़हब है यही,
तेरी चौखट पे जिए और मरे।
नसीब में जो भी लिखा हो मेरे,
मैंने तो तुझको ही रब माना सनम।
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।
बदल जाती है हवाओं की बंदिशें,
जब इस कूचे में कदम बढ़ाता सनम।
धड़कनें मेरी मचलने लगती हैं,
खामोशियाँ भी कुछ कहने लगती हैं।
तेरे घर की वो चौखट, वो बंद झरोखा,
जहाँ मेरी सारी उम्मीदें ठहरने लगती हैं।
ये जो नगमा है, ये सिर्फ सुरों का खेल नहीं,
ये दो रूहों का मिलन है, कोई मामूली मेल नहीं।
दुनिया लाख पहरे बिछा दे इस मोहब्बत की राह में,
पर जब तक दम में दम है, ये दीवाना झुकता नहीं।
तू सुने या न सुने मेरी इस वफ़ा की सदा,
मैं तो उम्र भर यही गीत गुनगुनाता सनम।
तेरी गली में आता सनम,
नगमा प्यार का गाता सनम।