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जिंदगी से क्या शिकवा

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Lyrics

(ओहो... सुन ना...)
जिंदगी से क्या शिकवा करें,
इसने जो दिया, वही बहुत है।
कभी धूप दी, कभी छाँव दी,
हर हाल में जीना सिखा दिया।
माना कि कुछ ख्वाब अधूरे रहे,
पर गिरकर फिर से खड़ा किया।
जिन्होंने साथ छोड़ा, तजुर्बा मिला,
जो साथ हैं, उनसे जहाँ मिला।
जिंदगी से क्या शिकवा करें,
यह तो एक बहता दरिया है।
कभी धूप की तपिश है इसमें,
कभी छांव का जरिया है।
शिकवा छोड़ो, मुस्कुराकर गले लगाओ,
ये दोबारा नहीं मिलने वाली है।
शिकवा क्या करना उन राहों से,
जो मंजिलों तक न जा सकीं।
उन ख्वाबों से क्या रूठना भला,
जो आँखें सच न कर सकीं।
ये जिंदगी एक किताब है,
हर पन्ना नया सबक देती है।
जिंदगी से क्या शिकवा करें,
यह तो एक बहता दरिया है।
कभी धूप की तपिश है इसमें,
कभी छांव का जरिया है।
शिकवा छोड़ो, मुस्कुराकर गले लगाओ,
ये दोबारा नहीं मिलने वाली है।
जो बीत गया, उसे भूलकर आगे बढ़ें...
बस जी भरकर जीना है,
जिंदगी से क्या शिकवा करें...
(ओहो...)

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