येह, देखो, सुनो ज़रा ध्यान से
सफेद कोट का सम्मान, बात ज़मीर की है, जान से
दस साल की पढ़ाई, रातें नींदों में ना बीती
किताबों में डूबे, हर परीक्षा थी बड़ी रीती
सोचा बनेंगे मसीहा, बचाएंगे हर जान को
पर ये समाज क्या समझेगा, इस डॉक्टर के अरमान को?
खून पसीना एक किया, ज्ञान था मेरा हथियार
आज क्यों मेरे ही दामन पे लगे हैं ये वार
कितनी कीमत चुकाई है, डिग्री ये पाने में
हर मर्ज की दवा ढूंढी, खुद को मिटाने में
सफेद कोट में खड़े, हम इंसानियत के नाम पर
बचाते हैं जान, फिर क्यों झेलें ये जुल्म हर शाम पर?
फीस की बातें करते, मेहनत का हिसाब कौन देगा?
अस्पतालों में हिंसा, ये अन्याय कब तक सहेंगे?
हमारी भी ज़िंदगी है, हमारी भी जान है
डॉक्टर पे हमला करना, ये कैसी पहचान है?
मरीज़ों की सेवा में, खुद को भूला बैठे हैं
घर परिवार छोड़ा, हर सुख त्याग बैठे हैं
इमरजेंसी में दौड़ें, जान हथेली पे रखकर
पर भीड़ का गुस्सा, क्यों मुझ पे ही आ रहा है अकड़कर?
नियम कानून कहाँ हैं, जब मुझपे वार होता है?
एक पल में मेरा काम, मौत से भी हार जाता है
सैलरी की बात क्या करें, जो हक़ है वो भी नहीं मिलता
और इलाज के बदले, हमें पत्थर क्यों है मिलता?
सफेद कोट में खड़े, हम इंसानियत के नाम पर
बचाते हैं जान, फिर क्यों झेलें ये जुल्म हर शाम पर?
फीस की बातें करते, मेहनत का हिसाब कौन देगा?
अस्पतालों में हिंसा, ये अन्याय कब तक सहेंगे?
हमारी भी ज़िंदगी है, हमारी भी जान है
डॉक्टर पे हमला करना, ये कैसी पहचान है?
येह, सुनो ज़रा, बदलाव ज़रूरी है
इज़्ज़त दो, काम को समझो, ये मजबूरी है
डॉक्टर है जान, डॉक्टर है सम्मान, नो कैप!