मेरी रूह में बसी हो तुम, मेरी धड़कन में हो
खामोशी में भी, एक बात है तुम्हारी
लबों पर ना सही, आँखों में है खुमारी
रिमझिम सी बारिश में, ढूंढा है मैंने तुम्हें
हर साँस में, हर पल में, पाया है मैंने तुम्हें
तुम ही मेरी धड़कन, तुम ही मेरी साँस हो
जीवन का हर मजमून, मेरी हर आस हो
रूह से रूह का ये कैसा रिश्ता है (oye)
बिन कहे सब समझूँ, ये कैसा किस्सा है
दिल की गहराई में, एक सवाल सा है
क्या ये प्यार है, या कोई कमाल सा है
तुमसे मिलकर जाना, दुनिया ये क्या होती है
मेरी हर कहानी अब, तुमसे ही शुरू होती है
तुम ही मेरी धड़कन, तुम ही मेरी साँस हो
जीवन का हर मजमून, मेरी हर आस हो
रूह से रूह का ये कैसा रिश्ता है (kya baat)
बिन कहे सब समझूँ, ये कैसा किस्सा है (oh ho)
हाँ, तुम ही मेरी साँस हो (hai)
रूह का रिश्ता...