ओ बाबा...
सुन ना...
बाबा, ऐसा वर ढूँढो, जो महलों का न राजा हो
पर जिसके दिल का कोना-कोना, मेरे लिए ही साजा हो
दौलत की कोई चाह नहीं, न सोने का अंबार मिले
बस सूखी रोटी में भी, उसका असीम वो प्यार मिले
बाबा ऐसा वर ढूँढो, हाँ ऐसा वर ढूँढो
जो मेरी हँसी की कीमत समझे, आँसू न बहने पाए
बाबा ऐसा वर ढूँढो, हाँ ऐसा वर ढूँढो
जो मेरे सपनों को भी, अपने पंखों की उड़ान दे
गुस्सा अगर कभी आए मुझे, तो हँसकर मुझे मनाए
मैं अपने बाबुल का आँगन, जिसके भरोसे छोड़ सकूँ
दुख-सुख की इस धूप-छाँव में, जो साए की तरह साथ चले
जब सारी दुनिया छोड़ भी दे, तो थामे मेरा हाथ चले
बाबा ऐसा वर ढूँढो, हाँ ऐसा वर ढूँढो
जो मेरी हँसी की कीमत समझे, आँसू न बहने पाए
बाबा ऐसा वर ढूँढो, हाँ ऐसा वर ढूँढो
जो मेरे सपनों को भी, अपने पंखों की उड़ान दे
बाबा ऐसा वर ढूँढो...
हाँ ऐसा वर ढूँढो...