ये दुनिया एक मुसाफिरखाना, कौन यहाँ ठहरता है?
हर पल बदलती है ये कहानी, वक्त कहाँ रुकता है?
जो आज मिला है अपना सा, कल वो रहता कौन है?
हवाओं के रुख पर लिखी, ये रेत फिसल जाएगी,
पकड़ लो कितनी भी कस के मुट्ठी, ये निशानी छूट जाएगी। (ओये)
ये सफर भी छूट जाएगा, इक नई सुबह आएगी,
जो साथ चले, जो साथ हँसे, बस वही याद रह जाएगी।
मुसाफिर हैं हम राही, राहें पुरानी छूट जाएंगी,
ये जिंदगी अपनी चाल मस्तानी, चलती ही जाएगी। (ओह हो)
रास्तों की धूल में, कुछ निशान रह जाएँगे,
हँसते-रोते चेहरों के, कुछ गुमान रह जाएँगे।
याद करो बीते लम्हे, आँखों में नमी आएगी,
वही चमक रूह में तुम्हारी, एक नई जान लाएगी। (क्या बात)
ये सफर भी छूट जाएगा, इक नई सुबह आएगी,
जो साथ चले, जो साथ हँसे, बस वही याद रह जाएगी।
मुसाफिर हैं हम राही, राहें पुरानी छूट जाएंगी,
ये जिंदगी अपनी चाल मस्तानी, चलती ही जाएगी।
न शोर रहेगा, न खामोशियाँ, बस यादें रह जाएंगी,
ये सफर भी छूट जाएगा... और नया आगाज़ आएगा। (हई!)