(सुन ना...)
धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए धड़कने की ज़िद पर अड़ी है।
ख़ुदा से माँगूँ तो भला और क्या माँगूँ?
जब तूने मेरी पूरी कायनात को ही समेट लिया।
इश्क़ की इस किताब का हर पन्ना गवाह है,
कि मैंने अपनी हर ख़ुशी को तेरे नाम लिख दिया।
न इसे होश है अपना, न दुनिया का कोई डर है,
तुझी से शुरू होती है, तुझी पर इसका सफ़र है।
धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए धड़कने की ज़िद पर अड़ी है, (हाय)
तुम्हारी राह के अलावा, ये कोई रास्ता न चुने।
ज़माने भर के बंधनों को तोड़कर ये खड़ी है,
धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए धड़कने की ज़िद पर अड़ी है।
तू लाख मोड़ ले नज़रें, तू लाख कर ले बेरुख़ी,
मेरी हर दुआ तेरी चौखट पर, सजदा करने को अड़ी है।
अब तो आईने में भी चेहरा मेरा नहीं, तेरा दिखाई देता है,
ये बेकाबू दिल सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी गवाही देता है।
धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए धड़कने की ज़िद पर अड़ी है,
तुम्हारी राह के अलावा, ये कोई रास्ता न चुने।
ज़माने भर के बंधनों को तोड़कर ये खड़ी है,
धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए धड़कने की ज़िद पर अड़ी है।
सुनो, मेरे हमनशीं, मेरे हमदम, मेरी जान,
ये धड़कन सिर्फ़ तेरे लिए... हाँ, सिर्फ़ तेरे लिए।