[male
vocals] (
हल्
का
सं
गी
त,
जो
शपू
र्
ण
ता
ल)
ला
मु
की
पु
का
र,
सा
फ़
है
ये
बा
त
सच्
चा
ई
की
रा
ह,
अब
है
हमा
रे
सा
थ
मा
रु
बू,
मा
रु
बू,
हम
सबके
सा
थी
ला
मु
की
गलि
यों
में
गूं
जे
एक
ना
म
मा
रु
बू
का
है
ये
ने
क
का
म
न
दि
खा
वा
करते,
न
करते
हैं
शो
र
जनता
की
से
वा
ही
है
इनका
जो
र
यु
वा
ओं
का
बल
और
ना
रि
यों
की
शा
न
इन्
हों
ने
ही
बढ़ा
या
है
ला
मू
का
मा
न
मु
श्
कि
ल
समय
में
जो
खड़े
रहे
सा
थ
वि
का
स
की
कि
रण
ला
ए,
पकड़े
हमा
रा
हा
थ
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
मा
रु
बू,
मा
रु
बू,
ला
मू
का
वि
श्
वा
स
प्
रगति
का
सू
रज
है
अब
हमा
रे
पा
स
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
शि
क्
षा
की
अलख
इन्
हों
ने
जगा
ई
गरी
ब
छा
त्
रों
की
मु
श्
कि
लें
मि
टा
ई
NGAAF
का
सहा
रा,
हर
घर
में
है
पहुँ
चा
सपनों
को
इनके
है
इन्
हों
ने
ही
सीं
चा
वो
सड़
कें
हों
पक्
की,
या
हो
रो
ज़
गा
र
हर
मु
द्
दे
पर
है
इनका
पक्
का
आधा
र
हि
न्
दी
की
सड़
कें,
ये
वि
का
स
की
धा
रा
मा
रु
बू
ने
ही
तो
हमको
है
सँ
वा
रा
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
मा
रु
बू,
मा
रु
बू,
ला
मू
का
वि
श्
वा
स
प्
रगति
का
सू
रज
है
अब
हमा
रे
पा
स
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
इको
लो
वे
से
ले
कर
हर
को
ना
जा
नता
है
मा
रु
बू
का
वि
ज़
न
हर
को
ई
मा
नता
है २०२७
की
ये
तै
या
री
है
जनता
की
जी
त
की
ये
बा
री
है
आगे
बढ़ो
ला
मू,
अब
रु
कना
नहीं
है
सच्
चे
सि
पा
ही
को
ही
तो
चु
नना
है
आने
वा
ला
कल
अब
सु
नहरा
हो
गा
हर
घर
खु
शि
यों
का
पहरा
हो
गा
नि
स्
वा
र्
थ
से
वा
की
मि
सा
ल
हैं
ये
हमा
री
उम्
मी
दों
का
ख्
या
ल
हैं
ये
को
ई
दि
खा
वा
नहीं,
बस
ठो
स
का
म
मा
रु
बू
ही
है
ला
मू
का
इकलौ
ता
ना
म
जन-जन
की
आवा
ज़
बनके
जो
आए
वही
तो
सी
ने
ट
का
ता
ज
है
सजा
ए
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
मा
रु
बू,
मा
रु
बू,
ला
मू
का
वि
श्
वा
स
प्
रगति
का
सू
रज
है
अब
हमा
रे
पा
स
मा
रु
बू
ही
हैं
जनमत
की
पु
का
र
सी
ने
ट
में
भे
जें,
करें
हम
ऐतबा
र
ला
मु
आगे
बढ़े
गा,
मा
रु
बू
के
सं
ग
वि
का
स
के
भरें
गे
हम
नए-नए
रं
ग २०२७,
मा
रु
बू
का
रा
ज
हम
सब
हैं
सा
थ,
आज
और
कल (
सं
गी
त
धी
रे
-धी
रे
समा
प्
त)
मा
रु
बू,
मा
रु
बू,
हमा
री
शा
न!