अरे सुनो भाई!
चाय की खुशबू, और ये टशन!
सुबह की धूप में जो केतली उबलती है,
तेरे हाथ की चाय तो जादू बदलती है,
नुक्कड़ पे बैठे सारे यार दीवाने हैं,
इस कड़क स्वाद के लाखों अफ़साने हैं।
तेरी चाय की टपरी पर सबकी नज़र है,
इस कड़क चाय का ही तो सारा असर है,
हाँ जी! सबकी नज़र है, सबकी नज़र है,
तेरी चाय की टपरी का ये ही तो सिहर है!
इलायची की खुशबू और अदरक का स्वैग है,
गपशप का अड्डा यहाँ, बातें अनकैप्ड हैं,
अमीरों की गाड़ी थमे, गरीबों का सहारा है,
तेरी टपरी का नज़ारा सबसे प्यारा है।
तेरी चाय की टपरी पर सबकी नज़र है,
इस कड़क चाय का ही तो सारा असर है,
हाँ जी! सबकी नज़र है, सबकी नज़र है,
तेरी चाय की टपरी का ये ही तो सिहर है!
तो डाल एक और प्याला भाई!
सबकी नज़र है!
हाँ जी!