[female vocals] ओह...
हम
सब
मु
सा
फि
र
हैं
अपनी
अपनी
रा
हों
के
कु
छ
पन्
ने
खु
ले
हैं
कु
छ
अभी
बा
की
हैं
को
ई
मे
रे
कहा
नि
यों
में,
मैं
कि
सी
और
की
कहा
नि
यों
में
हम
सब
कि
रदा
र
हैं
कई,
अलग-अलग
कहा
नि
यों
में
एक
कि
ता
ब
हा
थ
में
है,
और
कलम
कि
स्
मत
की
लि
ख
रहे
हैं
मं
ज़ि
लें
हम,
अपनी
ही
मे
हनत
की
रा
हों
में
धू
प
भी
है,
और
ठं
डी
छाँ
व
भी
हौ
सलों
में
जज्
बा
है,
और
मन
में
गाँ
व
भी
उठना
गि
रना
तो
री
त
है,
ये
दु
नि
या
की
दस्
तू
र
है
ठहर
के
जो
दे
खो
तो,
हर
लम्
हा
मशहू
र
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
कल
फि
र
ये
कहा
नी,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
खु
शि
यों
से
लि
खो
इसे,
जो
तु
मने
ठा
नी
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
को
ई
कहा
नी
सच्
ची
है,
को
ई
कहा
नी
झू
ठी
है
बि
खरी
हु
ई
ख्
वा
हि
शें,
हा
थों
से
क्
यों
छू
टी
है
सच
तो
ये
है
दो
स्
त
मे
रे,
कि
रदा
र
सब
नि
भा
ते
हैं
कि
स्
से
जो
पु
रा
ने
हैं,
वो
या
दें
बन
के
आते
हैं
सं
घर्
षों
की
स्
या
ही
से,
पन्
ने
जब
ये
भरें
गे
कल
जब
हम
पलटें
गे,
तो
हम
ही
खु
द
को
पढ़ें
गे
नि
भि
श
कु
मा
र
सिं
ह
सु
नो,
ये
सच
है
जा
न
ले
तू
अपनी
ही
कहा
नी
का,
खु
द
ही
तू
मा
न
ले
तू
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
कल
फि
र
ये
कहा
नी,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
खु
शि
यों
से
लि
खो
इसे,
जो
तु
मने
ठा
नी
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
वक्
त
का
पहि
या
चलता
है,
ये
रु
कता
नहीं
कभी
जो
कल
था
वो
बी
त
गया,
ये
सच
है
आज
भी
अपनी
पहचा
न
बना
ले,
अपने
ही
कि
रदा
रों
से
इश्
क
कर
तू
ज़ि
न्
दगी
को,
अपने
ही
वि
चा
रों
से
नि
भि
श
कु
मा
र
सिं
ह,
तू
आगे
बढ़ता
जा
अपनी
नई
कहा
नी
को,
तू
खु
द
ही
गढ़ता
जा
सू
रज
की
पहली
कि
रण,
उम्
मी
द
का
पै
गा
म
है
ते
री
मे
हनत
ही
ते
री,
असली
यहाँ
पहचा
न
है
डरना
नहीं
तू
रा
हों
से,
तू
तो
एक
सि
ता
रा
है
दु
नि
या
की
भी
ड़
में,
खु
द
का
ही
सहा
रा
है
मि
ट
जा
एँ
गी
ये
स्
या
ही,
सब
धुं
धला
हो
जा
एगा
जो
जि
या
है
अपने
लि
ए,
वही
या
द
रह
जा
एगा
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
कल
फि
र
ये
कहा
नी,
कहा
नी
ही
हो
जा
नी
है
खु
शि
यों
से
लि
खो
इसे,
जो
तु
मने
ठा
नी
है
जी
लो
अपने
अं
दा
ज़
में,
अपने
अनु
भव
की
डगर
हर
कहा
नी
को
आखि
र,
बन
जा
ना
है
खबर
कहा
नी
ही
रह
जा
नी
है...
बस
ते
री
या
दें,
और
ते
री
बा
तें
जी
ले
तू
अभी...
यही
तो
सच
है...
कहा
नी...
बस
कहा
नी...