तुम अगर साथ देने का वादा करो
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं ज़माने के हर ग़म को भुला दूँगा।
राहों में जो बिछे हैं काँटे अगर,
मैं उन काँटों पर भी फूल खिला दूँगा।
भटकती हुई कश्ती को किनारा मिले,
जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिले,
तुम जो थाम लो हाथ मेरा एक बार,
मैं अपनी तक़दीर का रुख़ मोड़ दूँगा।
ये दुनिया चाहे जितनी भी बेगानी हो,
चाहे अधूरी अपनी कोई कहानी हो,
तुम अगर हमक़दम बन के चलते रहो,
मैं हर मुश्किल सफ़र को आसां बना दूँगा।
ना मंज़िल की परवाह, ना रास्तों का डर,
बस तुम साथ रहना मेरे उम्र भर,
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं अपनी पूरी ज़िंदगी तुम पर लुटाता राहू.
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं ज़माने के सारे सितम भूल जाऊँ।
पाँव के छालों की फ़िक्र छोड़ दूँ,
राह की हर कठिन रस्म भूल जाऊँ।
ये जो दुनिया खड़ी है दीवार बनकर,
इसकी बेरुखी का मुझे डर नहीं,
धूप हो, छाँव हो, या हो तूफ़ाँ कोई,
तुम जो हमकदम हो, तो कोई फ़िक्र नहीं।
तुम्हारी एक मुस्कान के सामने,
मैं तकलीफ़ों की हर रक़म भूल जाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो...
वक़्त की गर्द में खो न जाएँ कहीं,
आरज़ू के हसीँ और नाज़ुक दिये,
फासले जितने भी हों हमारे दरमियाँ,
कम लगेंगे अगर तुम मेरे संग जिये।
हाथ में हाथ लेकर जो तुम चल पड़ो,
मैं मुक़द्दर के सारे भरम भूल जाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो...
ज़िंदगी के सफर में हज़ारों मिले,
पर दिल को सुकूँ बस तुझी से मिला,
खो गया था जो इस भीड़ में कब से,
उस खुद को दोबारा मुझी से मिला।
तुम जो कह दो कि तुम बस मेरे हो अभी,
मैं ज़माने के सारे नियम भूल जाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो...
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं ज़माने के सारे सितम भूल जाऊँ।
ये जो राहों में बिखरे हैं कंकड़-पिटक,
इनको मख़मल की कोमल कसम भूल जाऊँ।
तल्ख़ियाँ जो मिलीं ज़िंदगी से मुझे,
तुम हँसो तो वो सारे अलम भूल जाऊँ।
धुंधली-धुंधली सी यादों के साए हैं जो,
तेरी आँखों में खोकर वो ग़म भूल जाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं नए रास्तों पर निकलना सिखाऊँ।
डगमगाते हुए मेरे इन कदमों को,
तेरी धड़कन की लय पर संभलना सिखाऊँ।
रात कितनी भी काली, सयानी सही,
एक जुगनू की सूरत पिघलना सिखाऊँ।
जो रुकी है सदियों से आँखों में मेरी,
उस रुआंसी नदी को उबलना सिखाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं दुआओं में तुमको ही माँगा करूँ।
छोड़कर ये बनावटी दुनिया के मेले,
तेरी परछाई के पीछे भागा करूँ।
हाथ में हाथ हो, बस तुम्हारा असर हो,
फिर सफ़र चाहे जैसा भी हो, बेफ़िकर हो।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं मौत को भी हँसकर गले से लगाऊँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं हवाओं के रुख को बदलना सीख लूँ,
ये जो कांटे बिछे हैं मेरी राहों में,
मैं इन कांटों पे हंस कर भी चलना सीख लूँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं अंधेरों से लड़ना भी सीख लूँ,
जो ये धुंधली सी दिखती है मंजिल मेरी,
मैं सितारों से आगे निकलना सीख लूँ।
तुम अगर साथ देने का वादा करो,
मैं ज़माने के हर गम को सहना सीख लूँ,
जो रुलाती है मुझको ये तन्हाइयां,
मैं तुम्हारी मोहब्बत में बहना सीख लूँ।
तुम बस नजरों से अपनी हामी तो भरो,
मैं बिखर कर भी फिर से संवरना सीख ता रहू!!