हा
य
ये
इश्
क
की
ये
कै
सी
रवा
नी
है!
ते
रे
करी
ब
आने
से
धड़
कनें
ये
बदल
जा
ती
हैं
ते
रे
जि
स्
म
को
छू
ता
हूं
तो
मे
रे
जि
स्
म
में
आग
लगती
है
ख्
वा
बों
में
भी
बस
ते
रा
ही
सा
या
रहता
है
मे
री
रू
ह
में
बस
ते
रा
ही
खु
मा
र
बहता
है
ते
रे
जि
स्
म
को
छू
ता
हूं
तो
मे
रे
जि
स्
म
में
आग
लगती
है
ये
कै
सी
तड़
प
है
जो
रू
ह
तक
मे
री
जलती
है
मे
रे
सनम!
मे
रे
या
र!
ये
आग
ही
बं
दगी
है
ते
रे
इश्
क
में
ही
तो
मे
री
सा
री
जिं
दगी
है
सां
सें
मे
री
ते
री
खु
शबू
से
महकने
लगी
हैं
आं
खें
मे
री
तु
झसे
ही
अब
दु
नि
या
दे
खने
लगी
हैं
हर
एक
लफ्
ज
में
ते
रा
ही
जि
क्
र
आता
है
ये
दि
ल
भी
अब
तु
झे
पा
ने
की
ज़ि
द
कर
जा
ता
है
ते
रे
जि
स्
म
को
छू
ता
हूं
तो
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रे
जि
स्
म
में
आग
लगती
है
ये
कै
सी
तड़
प
है
जो
रू
ह
तक
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री
जलती
है
मे
रे
सनम!
मे
रे
या
र!
ये
आग
ही
बं
दगी
है
ते
रे
इश्
क
में
ही
तो
मे
री
सा
री
जिं
दगी
है
तु
झसे
शु
रू,
तु
झपे
खत्
म
मे
री
ये
कहा
नी
है
मे
रे
जि
स्
म
की
प्
या
स,
ते
री
मो
हब्
बत
का
पा
नी
है
वा
हा!
रब!
वहा!
तु
झे
छू
ने
की
चा
हत
अब
इबा
दत
बन
गई
है
मे
री
हर
मु
श्
कि
ल
अब
ते
री
चा
हत
बन
गई
है
आग
ये
जो
लगी
है,
ये
मि
टे
गी
नहीं
कभी
तु
झे
पा
लि
या
तो
समझो
मि
ल
गई
मु
झे
सबी
ते
रे
जि
स्
म
को
छू
ता
हूं
तो
मे
रे
जि
स्
म
में
आग
लगती
है
ये
कै
सी
तड़
प
है
जो
रू
ह
तक
मे
री
जलती
है
मे
रे
सनम!
मे
रे
या
र!
ये
आग
ही
बं
दगी
है
ते
रे
इश्
क
में
ही
तो
मे
री
सा
री
जिं
दगी
है
ते
रे
जि
स्
म
को
छू
ता
हूं
तो
आग
लगती
है
मे
रे
मौ
ला!
मे
री
रू
ह
भी
जलती
है
ते
रा
इश्
क
ही
मे
री
आखि
री
मं
जि
ल
है
इश्
क
है,
बस
इश्
क
है!