ओह
हो,
सु
न
ना...
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है।
महफि
लों
में
चर्
चे
ते
रे
ना
म
के
हो
ते
हैं
पर
मे
रे
दि
ल
में
बस
ये
ख्
या
ल
हो
ते
हैं
जा
म
छलके
तो
मयखा
ने
बदल
जा
ते
हैं
पर
मे
री
नजरें
जो
उठे,
तो
तू
सं
भल
जा
ते
हैं
ते
री
आँ
खों
में
गहरा
ई
का
कि
ना
रा
है
मे
रे
दि
ल
का
बस
एक
तू
ही
सहा
रा
है
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
मो
हब्
बत
नहीं,
बस
रू
ह
का
इरा
दा
है
हाँ,
ओए,
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
सा
दगी
ही
तो,
मे
रा
सबसे
बड़ा
वा
दा
है
दु
नि
या
की
भी
ड़
में
तू
बस
एक
हकी
कत
है
मे
री
रू
ह
की
ये
छो
टी
सी
इबा
दत
है
कहाँ
ढूँ
ढूँ
तु
झे,
तू
तो
खु
द
में
समा
या
है
मे
री
साँ
सों
ने
बस
ते
रा
ना
म
ही
गा
या
है
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
मो
हब्
बत
नहीं,
बस
रू
ह
का
इरा
दा
है
हाँ,
क्
या
बा
त,
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
सा
दगी
ही
तो,
मे
रा
सबसे
बड़ा
वा
दा
है
इश्
क
की
रा
हों
में,
हम
खो
से
गए
हैं
ते
री
बा
तों
में
हम,
अब
सो
से
गए
हैं
को
ई
जा
म
न
दे,
बस
तू
पा
स
रह
जा
मे
री
रू
ह
के
इस
सा
गर
में
बह
जा
चां
दनी
रा
त
है,
और
तू
सा
मने
है
जन्
नत
का
हर
एक
पल,
ते
रे
ही
दा
मन
में
है
नजरों
से
पढ़
ले,
दि
ल
की
ये
बा
तें
सजती
रहें
यूँ
ही,
अपनी
ये
रा
तें
तू
ही
सु
कू
न
है,
तू
ही
मे
री
मय
है
ते
रे
बि
ना
ये
जिं
दगी,
बस
एक
जड़
सी
शय
है
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
मो
हब्
बत
नहीं,
बस
रू
ह
का
इरा
दा
है
हाँ,
दू
म,
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
ये
सा
दगी
ही
तो,
मे
रा
सबसे
बड़ा
वा
दा
है
मे
री
नजर
का
नशा,
ते
रे
जा
म
से
ज्
या
दा
है
बस
तू
ही
तू,
अब
ते
रा
ही
इरा
दा
है
ले
ट’
स
गो,
बस
ते
रा
ही
इरा
दा
है
मे
री
नजर
का
नशा...
नशा,
ये
नशा।